प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देशभर में कथित साइबर धोखाधड़ी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में करीब 30,000 करोड़ रुपये के लेन-देन का आरोप है।
ED ने बताया कि फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद को रविवार को मुंबई से हिरासत में लिया गया।
ED ने यह जांच तब शुरू की जब गोवा की एक महिला कथित तौर पर साइबर ठगों के जाल में फंस गई। डिजिटल अरेस्ट के बाद ठगों ने उसे मई और जून 2025 के बीच करीब 2.60 करोड़ रुपये तथाकथित ‘सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट्स’ में ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन काम करने वाली एजेंसी ED ने रविवार को दोनों आरोपियों को मुंबई की विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) अदालत में पेश किया। अदालत ने उन्हें गोवा के पणजी ले जाने के लिए ED को ट्रांजिट रिमांड दे दिया, जहां यह मामला दर्ज है।
ED को पता चला कि पीड़िता से ठगी गई रकम विभिन्न बैंक खातों में जमा की गई, फिर उसे नकद निकाला गया और इसके बाद आरबीआई से लाइसेंस प्राप्त मनी चेंजरों के जरिए विदेशी मुद्रा में बदला गया।
ED को इस कथित साइबर अपराधी नेटवर्क द्वारा करीब 27,000 करोड़ रुपये के बैंक लेन-देन और लगभग 3,000 करोड़ रुपये के नकद लेन-देन किए जाने का संदेह है। यह नेटवर्क कथित तौर पर 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज 150-160 FIR और करीब 300 पीड़ितों की शिकायतों में सामने आया है। पीड़ितों से की गई कुल कथित धोखाधड़ी करीब 4,000 करोड़ रुपये की है।
ED ने इस मामले में जुलाई में गोवा और मुंबई में दो दौर की छापेमारी की थी। इसके बाद 21 अगस्त को नवीनतम छापेमारी की गई। इन कार्रवाइयों के दौरान करीब 3.25 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए।
जांच में सामने आए मनी ट्रेल से पता चला कि इस नेटवर्क में शामिल शेल या फर्जी कंपनियों में निदेशक के तौर पर ऐसे ड्राइवर और कर्मचारी दिखाए गए थे, जो एक कमरे के छोटे आवास में रहते थे।
